Aage Badhte Rehna
Updated: Jan 11, 2023
By Aditya Jha
चन्दन में बिषधर भी होंगे
मुक्ति में बंधन भी होंगे ।
पर राही तू न घबराना
धरा अभी अधूरी पड़ी है ।
न रुकना न थकना तुम
अभी प्रकृति के सृजन की घड़ी है ।
मिलती बुलंदी ,श्रम बिंदु में भींग कर ,
कायर ही खोजता खैरात है ।
तू चल नहीं सकता तो क्या हुआ ?
हिमालय अचल पर विराट है |
पथ है तो रोड़े भी होंगे,
फूलों में कांटें भी होंगें |
पर व्यापारी जो हैं संबंधों के ,
फिर उनसे क्या दोस्ती यारी।
जितनी संबंधों की गठरी हल्की,
भरमाये न माया की बेड़ी।
थकन भूल जा तू तन मन की
कर अपने में ऐसा संकल्प।
विनिमय हो तुम्हारा प्रेम का केवल ,
व्रत हो नर का क्षेम, कुशल।
जीवन है, मरण भी होंगे
हास्य में रुदन भी होंगे l
पर श्याम घटाओं को चीड़े,
प्राची में अरुणोदय होगा ।
दूर छंटेगा तिमिर धरा से
तन मन का अभ्भुदय होगा ।
बन जायेंगे मील के पत्थर
राह में बिखरे पाषाण ।
रश्क़ करेंगे चाँद सितारे
मुस्काएगी लता वितान ।
दिए हैं शामें भी होंगे ,
रवि हैं तो राहु भी होंगे |
By Aditya Jha

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