Aa Hom Kar
Updated: Nov 28, 2022
By Shalini Asher
दशहरा आ रहा है
फिर ढोंग करोगे तुम
रावण के पुतले को जलाने का ।
फिर अपनी पीठ थपथपाओगे
और बच्चों को सिखाओगे
दशहरे और दीवाली मनाने का सबब।
कहाँ मरा रावण? तुमही में तो है ।
अच्छा बताओ, विद्वान हो कर भी
कौन सी भूल ने रावण को
यूँ परिवार समेत विधवंस कर दिया?
ना। अहंकार मत कहना।
मरा वह अहंकार के कारण था
पर भूल थी पर-स्री को
इच्छा विरुध्द हरण करना।
कहाँ सीख ले पाए तुम, कहो?
'ना' का अर्थ समझते हो क्या?
वह 'एक' रावण था, आज सपोलों की
फ़ौज हर घर-गली पल रही है ।
राम को पूजते हो व्यर्थ ही,
तुम्हारा ईष्ट तो रावण है।
नहीं, शायद यह भी गलत है ।
उसमें हज़ार गुण थे।
तुम केवल अवगुणों का ढेर हो।
सीता की तरह किसी राम का
इंतजार व्यर्थ है ।
पर-निंदा के स्वर आज भी
उसी तरह तीव्र हैं ।
कहो कब तक यूँ ही बेचारी बन
उजड़ती रहोगी तुम?
दुर्गा हो, शक्ति हो तुम।
उठा आत्म-विश्वास का खड्ग
और सम्बल का कवछ बना
चल आज फिर काली बन।
स्वाभिमान का मोल
जिस दाम मिले, झपट।
कर ध्वंस तू। आ होम कर।
By Shalini Asher

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