हसीनHashtag KalakarApr 29, 20231 min readRated NaN out of 5 stars.By Paras Minhasहसिन चेहरों का बाज़ार सज़ा है,प्यारी बातें सरेआम बिकी हैं॥एतबार उधार पड़ा है,क़समें वादों के ढेर लगें हैं॥सराफ़त को धूल लगी है,फ़रेब का मोल लगा है॥By Paras Minhas
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