शायर
By Jwala
शायर को खुश ना समझो
शायर बहुत उदास है
तीन दिनों से पेट है खाली
बस कागज़-कलम ही पास है
शायर को सब खास बताते
शायर का कोई न खास है
शायर को सब मारना चाहते
शायर ‘पाश’ की घास है
शायर के बस शब्द बड़े हैं
जिस्म में उसके जान नहीं
शायर माइक पे रोता है
तुम कहते क्या अंदाज है
शायर को खुश ना समझो
शायर बहुत उदास है
शायर में शर्म तनिक भी न
न रत्ती भर लिहाज है
शायर नशे बहुत करता है
उसके शे’र फ़हश है
शायर को दो चांटे जड़ दो
पड़ता उसको फर्क नहीं
पर शायर को बीच में टोका
तो फिर ये उपहास है
शायर को खुश ना समझो
शायर बहुत उदास है
शायर ‘इक उम्र से वाकिफ है’
लुत्फ-ओ-सितम वो जाने है
उसके महल पे काई जमी
जंगल में उसका निवास है
जीवन के वो गीत सुनाता
शायर ज़िंदा लाश है
शायर को खुश न समझो
शायर बहुत उदास है
शायर को खुश न समझो
शायर बहुत उदास है
By Jwala

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