वादा
By Chanchal Sharma
जब मैं ना दिखाई दूं और तुम ना चल सको
दोपहर में तप कर शाम में ना ढल सको
मोह छोड़ जो इश्क़ के कायदे कभी बदल सको
वो नूर जो दूर है उसे देख कर जल सको
तब ज़मीं से आसमां जहां मिलता है
तुम्हें वहां ठहरा मिलूंगा मैं...
और जो गर मैं ढल जाऊं
ज्यादा ना संभल पाऊं
और मिट्टी में बदल जाऊं
फ़िर,
तो फिर ढूंढना मुझे कहीं नया चेहरा बनकर मिलूंगा मैं...
तलाशना मुझको महक में
मस्तियों में छुपी चहक में
धुंधले पलों की खनक में,
फ़िर ढूंढना तुम्हें वहीं ठहरा मिलूंगा मैं...
ना मिला तो नया चेहरा बन के मिलूंगा मैं....
By Chanchal Sharma

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