बेटी
Updated: Sep 16, 2025
By सौम्या बरियार
क्यों नम है तेरी आखें,
क्या खुश नहीं है तू मुझे पाके?
सोचा मेरे आने से होगी तुझे ख़ुशी,
पर क्यों तू लग रही है दुखी l
क्या है ये तुझे डर,
कि क्यों हो गई मैं पैदा यहाँ पर?
क्या कर रहा है तुझे कमज़ोर?
क्या है इसके पीछे पिताजी के परिवार का ज़ोर?
मैं तो हूँ नन्ही सी कली,
आई तुझे देने ख़ुशी l
ये नहीं पता था मुझको,
कि इसकी सज़ा मिलेगी तुझको l
क्यों लोग मार देते है हम जैसी कलियों को?
क्या लगता है उन्हें कि बरबाद कर देंगे हम उनके भविष्य को?
क्यों नहीं समझते ये लोग,
कि अगर हम न होते तो न होते वो लोग l
क्यों है ये समाज इतना क्रूर?
जो बनाता है हर माँ को मजबूर,
बहुत से लोगों ने है ये सज़ा भोगी,
पर अब मिलकर इसके खिलाफ़ आवाज़ उठानी होगी l
जब सब मिलकर हल्ला बोलेंगे,
तब बंद दरवाज़े के ताले खुलेंगे l
मिलेगा हर अपराधी को दंड,
और मिलेगी हर माँ के कलेजे को ठंड l
तभी होगा इस समाज का कुछ उद्धार,
नहीं होगा किसी भी माँ पर कोई अत्याचार l
और फिर
, जब कभी कोई माँ लड़की पैदा करेगी,
तब वह बड़े ही शान से कहेगी,
" ये है मेरी बेटी "!
By सौम्या बरियार

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