पायल
Updated: Sep 16, 2025
By Anita Singh
नाजुक से पैरों का श्रृंगार है पायल, साजन के हृदय की झनकार है पायल, बजती है तो धड़कन की रफ्तार बढ़ा देती है, ना बजे तो दिल ए बीमार बना देती है। आंगन में बजती है लक्ष्मी रूप कहलाती है, बेटी के पैरों में दुर्गा रूप बनकर आती है, बजती है प्यार में तो राधा रूप धर लेती है, और बाज़ार में बजे तो शर्मसार है पायल। मां के पैरों में त्याग का रूप है पायल, पत्नी के पैरों में अधिकार है पायल, बहन के पैरों में मौके का प्यार है पायल, हर रूप में स्त्री का श्रृंगार है पायल।
By Anita Singh

Comments