पापा
By Pallavi Jawalkar
छोटी- छोटी गलतियों पर डांटने वाले
अपने कंधे पर बैठा कर सारी दुनिया दिखाने वाले
सिर्फ पापा! मेरे पापा!
भीड़ को देखकर जब मन घबराता है
अकेले चलने में जब कदम डगमगाते है
कोई है, जो हाथ थामकर रास्ता दिखाता है
कोई है, जो मुस्कुराकर हौसला बढ़ाता है
मां के गुस्से से जो सबसे पहले बचाते है
कोई साथ हो या ना हो, वो हमेशा साथ खड़े रहते है
सिर्फ पापा! मेरे पापा!
अच्छे-बुरे की पहचान करवाते हैं
पूरी दुनिया हर एक नज़रिए से दिखाते हैं
जिसकी डांट में भी प्यार छिपा है
जिसके गुस्से में भी फिक्र छिपी है
दुनिया के लिए कितनी भी बड़ी हो जाऊं
उनके लिए हमेशा उनकी प्यारी बेटी ही रहूंगी
नारियल की तरह सख्त और भीतर से एकदम साफ, शीतल, कोमल
सिर्फ पापा! मेरे पापा!
By Pallavi Jawalkar

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