पथिक
By Uday Kumar
एक पथिक जा रहा था, ये गाते हुए!
जिन्दगी एक खिलौना बताते हुए!
गर्दिशे जिन्दगी,आज है कल नहीं!
फतह हार का हो,कोई गम नहीं!
जीएं तो जीएं दूसरों के लिए ,
खुद के खातिर लहु बहाना मुनासिब नहीं !
गर्दिशे जिन्दगी,आज है कल नही!
फर्ज ही जिन्दगी का एक आधार हो!
गर्दिशे जिन्दगी भी वफादार हो,
वह जिन्दगी-जिन्दगी क्या?
जो समय रहते अपने को सम्हाला न हो!!
यह सुन्दर है फिर भी खिलौना ही है!
मिटना तो इसका नसीबों में है!
अगर सांस रुक गया तो ,बेचारा बना!
गर्दिशे जिन्दगी से छुटकारा मिला !!
यहाँ क्या मेरा?जिस पर ममता करें!
सब खुदा का दिया, छोड़ कर जा रहें!
एक पथिक जा रहा था ये गाते हुए !
जिंदगी एक खिलौना बताते हुए!
By Uday Kumar

Comments