गरीब
By Kavan Tapankumar Vaidya
रास्तो से जाने वाले अक्सर हमें गरीब कहते है।
उनको क्या मालूम रात सितारों से मिलते है।
आपको क्या मालूम हमारा घर कैसे बनता है,
उजड़े रास्तो पे ही हमारा आशियाना मिलता है।
कहे दो कुछ भी हमें अब बुरा नहीं लगता,
उसमें हमें अब कुछ भी नया नहीं लगता।
वो आँख हमें भी है जो आपको लगती है,
देखो गौर से!! हमारी एक ही जात लगती है।
हम भी कई बार आप को देख खुश हुआ करते है,
देखके के सब कुछ होते भी आप अक्सर रोया करते है।
रात हमारी नहीं जानती हमारी सुबह कैसी होगी,
इसी लिए रोज रात खुद को दफ़न कर सोते है।
रास्तो से जाने वाले अक्सर हमें गरीब कहते है,
उनकोक्यामालूमहमरोजरातसितारोंसेमिलतेहै।
By Kavan Tapankumar Vaidya

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