इश्क
By Poonam Saroj
खुबसूरत निगाहों में एक ख्वाब सजाए बैठे थे
कैसे बताएं कि हम भी कभी दिल लगाए बैठे थे।
इश्क की आंधी इतनी ज़ोर से आई कि
कब हमको भी उड़ा ले गई संग अपने,
भनक भी नहीं लगने दी इस बात की
वरना, हम तो दामन अपना बचाए बैठे थे।
कहां खुद को दुनिया की नज़रों से छुपाए बैठे थे।
वो नर्म सी रेशमी जुल्फें, वो हल्की बारिश की बूंदें
खुशनुमा मौसम भी जैसे गवाह थी
उस दौर में किसको किसकी परवाह थी
मगर उनका कहां आना हुआ
अब आया समझ, हम तो इंतजार में उनके
खामखां ही शमा जलाए बैठे थे।
कैसे बताएं कि हम भी कभी दिल लगा बैठे थे।।
By Poonam Saroj

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