इल्म
By Amit Sagar
सुना है तेरे चाहने वाले हज़ार हैँ,
कुछ फ़ना हो चुके कुछ अभी तक बीमार हैँ I
तेरा नशा अभी भी इनके सर पर है चढ़ा हुआ
क्यों हर कोई तुझे एक नज़र देखने का तलबगार है
सच बता क्या कोई इल्म हासिल है तुझे?
या दानिस्ता तू ख़ुद इनके क़त्ल की गुनहगार है I
By Amit Sagar

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