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आजिज़

By Dr. Shahina Praveen





ना जीने की तमन्ना, ना ख्वाहिश रही मरने की

कुछ इस क़दर आजिज़ तूने की, ऐ ज़िन्दगी

एक फैसला ही है की कोई फैसला ना हो

इसी कश्मकश में पोशीदा रब की बंदिगी।

शाहिना प्रावीन



By Dr. Shahina Praveen




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