आगाज़
By Swapna Jyoti
आगाज़ है ये मेरे सफर का
है पता मुझे जाना कहां
उम्र भर के तो सोए थे
आज जागे तो पता चला
अब ख्वाबों में भी नींद नहीं
बस इंतज़ार है अपने अकीबत का
यूं तो लाख खामियां हैं मुझमें
पर मैं खजाना हूं इल्मो अल का
खामोश हूं…
क्योंकि आवाज है मुझमें टूट के बिखरने का
है मबहुम किया मैंने बड़े ही अदब से हर टुकड़े को
लेकिन बरकरार है हर निशान
पर मिसाल है बनना मुझे हर रहगुजर का
मैं कुछ क्या कहूं…
मेरे अल्फाजों की जरूरत ही क्या..?
जब शोर है गूंजता यहां मेरे हुनर का
है उड़ना मुझे आजाद बेखौफ होकर
कैद नहीं कर सकती मुझे कोई जंजीर
फायदा ही क्या इन दिवारोदर का।
By Swapna Jyoti

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