आइना
By Seema Kaushik "Mukt"
आईने ,तू इतना सख्त क्यों है ?
क्यों दिखानी है तुझे क्रूर सच्चाई ?
क्या किसी का दिल रखना नहीं आता है ?
जैसा दिखता है ,तू दिखाता है !
यहाँ तक तो ठीक,सह लिया हमने …
क्यों दिल का हाल तू बताता है?
तुझ पर धूल, तो भी मैले हम !
ये सियासत तुझे कौन सिखाता है …
तू तो शायरी में अच्छा मक़ाम रखता है
फिर क्यों दूसरों को नीचा दिखाता है …
हम करे गिला-शिकवा, तुझे कोई फर्क नहीं
चिकने घड़े सा हरवक्त तू सताता है…
तेरा आईने सा किरदार है ,तो याद रख तू भी !
ज़रा सी ठेस से , वो चूर चूर हो जाता है …
By Seema Kaushik "Mukt"

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