अश्क़
By Dr. Astha Singh
लोग रोते हैं दुनिया को बतला कर,
यहाँ हर रात अश्कों में गुज़रती है।
पलकें होतीं हैं भारी,
फिर भी ये दर्द भरी मुस्कान होंठों पे उभरती है।
आँखो की नमी जो बनाती है धारा,
वो चेहरे से सिरहाने तक बेबाक़ उतरती है।
लोग रोते हैं दुनिया को बतला कर,
यहाँ हर रात अश्कों में गुज़रती है॥
सिसकना कभी आया नहीं हमें,
दबी ज़बान हमेशा खुलने से डरती है।
जब आहों से भर उठे मन का ज़र्रा-ज़र्रा,
तब दिल की ये चीख़ आंसुओं से निकलती है।
रोम-रोम काँपता है, मुँह से निकली बात याद कर,
आँखे बिछड़ने के नाम से डरती हैं।
लोग रोते हैं दुनिया को बतला कर,
यहाँ हर रात अश्कों में गुज़रती है॥
By Dr. Astha Singh

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