Soch
By Tushar Shekhar
आज सुबह मैं फिर एक बार जल्दी से उठा
अपने सारे कामो को आज ही निपटाने के लिए आगे बढ़ा
बॉस का टारगेट, मुन्नी की कोचिंग फी
नाई से बाल कटवाना, कपड़े की स्त्री
मुच्छड़ के पैसे लौटना गाड़ी की सफाई
नए कपड़े दिलवाकर खुश करूँगा अपनी लुगाई
आज कोई भी पौधा सूखा नहीं रहेगा
शाम तक कोई भी काम अधूरा नहीं रहेगा
आज से होगी मेरी एक नयी शुरुआत
मेरे काम से खुश होकर लोग करेंगे सिर्फ मेरी ही बात
घर के सारे व्यंजन भी मैं ही बनाऊंगा
शाम को सब्जिया भी मैं ही लाऊंगा
अब कोई भी नहीं रहेगा मेरे से खफा
सिर्फ मेरा ही जलवा होगा हर जगह हर दफा,
इतने में ही शोर हुआ दस बज रहा अब उठ भी जाओ
घर पर तो कुछ करते नहीं ऑफिस तो हो आओ
अचानक से नींद खुली और सपनो की दुनिया पीछे छूट गयी
सोंच तो मेरी अच्छी थी पर आज ऐसे ही काफी लेट हो गयी
कल से करूँगा एक नयी शुरुआत
आज रहने देता हूँ सपनो में ही सारी बात !!
By Tushar Shekhar

Comments