Shiv
By Riya Gupta
हे शिव, तुमसे सच्चा कोई नहीं
तुमसे अनूठा कोई नहीं ।
तुम्हीं हो सर्वव्यापक,
तुमसे बढ़कर कोई नहीं।
तुमसे ही तो जाना है
की क्या सच्चा क्या झूठा है।
इस माया की दुनिया में कैसे..
बस एक तुम्हारा साथ ही पक्का है।
तुमसे ही तो सीखा है
कठिनाइयों से लड़कर कैसे,
जीवन में आगे बढ़ना है।
चाहे हो तकलीफें कितनी भी
हर हाल में मस्त रहना है।
अधूरे कुछ सपनों को लेकर;
जब आई मैं तुम्हारी शरण में,
तब इस तथ्य को मैंने जाना,
की तुम्हारी बनाई इस दुनिया में
हर एक जीव अकेला है।
और जो तुम्हारी शरण में आया,
वहीं सुखों का राजा है
तुमसे ही मिलकर जाना मैंने,
की तुम्हीं हो आदी तुम्हीं अनंत हो,
तुम ही सभी की छाया हो।
भक्षक भी तुम, रक्षक भी तुम,
तुम्हीं तो असली माया हो।
हर एक जीव की काया भी तुम,
सच्चाई का सार तुम्हीं हो।
हो तुम्हीं सर्वव्यापक;
तुमसे बढ़कर कोई भी न हो।
By Riya Gupta

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