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Khoj

Updated: Jan 12, 2023

By Dr. Viral Sarvaiya (PT)



चली है आज सत्य के खोज की नैय्या।

पहुच गए हैं हम उस काल के वन मणिकर्णिका।

अंधकार का हृदय चिरती खड़ी हैं आज गंगा।

हूए हैं हैरान यम भी, मृत्यु की रोशनी ने दिखाया जीवन का रस्ता।


छै का अंत कर शक्ति का स्वरूप है सातवा,

आठवे के मनोरंजन में पोच गए मथुरा।

पचीस दुर्भावनाओं को सुलाकर यमुना जगी है।

गीता के ज्ञानधारक को संभाले हुए, जीवन आज पिता के मस्तिक्श पे दिखी है।


कहते हैं जितने तर्क उतने मार्ग, दृश्य अदृश्य के जाल को काटकर,

विवेकानंद के गुरु के द्वार पहुच गए दक्षिणेश्वर।

विश्वास तो काली मूर्ति पर भी हो जाए, यही भावना जुड़ जाए।

वही मां की गोदी सीर रख रामकृष्ण रॉए, जीवन रूपी आसुओं को प्रेम से पिरोये।



ऊँचे ऊँचे पहाड़ो मे रहती है सप्तशृंगी,

पहुच गए उस शक्ति से मिलने वणी।

अष्टभुजाओ का प्रभाव ऐसा, सारी दिशाओ में सैदैव चिंता करती मां जैसा।

जीवन के सार को बताता वैसा, मानो खोया हुआ बालक मां को पुकारे मयूस बैठा।


मिश्रन है वो तीन तत्वों के, प्रेम, ज्ञान, तेज के भंडार।

पहुच गए कृष्ण नदी के तट लेने दत्तात्रेय का आधार।

चीरंजीवी, तेजरूप, आनंद की परिभाषा, श्रीपाद वल्लभ बैठे देने आसरा।

पैरओ पे चलना सीख गए, बुद्धि से उड़ना। जीवन का पता तब चला जब मन ने सीखा गुरु चरनो में गिरना।


उगते, डूबते, जलते सूरज को देख, मन बैठा है शांत।

देख महावीर का प्रताप, प्रश्नों का मायाजाल बन गया राख।

जीवन सत्य के नाव पे चले थे हम वीर,

मन में जगा है त्याग का भाव, हो गए हैं स्थिर।

भीतर जाने का मार्ग मिला, जीवन का अर्थ खिला,

मूड गए अंतर की और, बुद्ध आज मुजमे जीवित दिखा।


By Dr. Viral Sarvaiya (PT)




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41 Comments

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Unknown member
Feb 01, 2023

Beautiful poem viru❣️

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Unknown member
Jan 30, 2023

Indeed a great poem 👍

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Unknown member
Jan 30, 2023

Viral, How thoughtful and mind blowing is this creation of yours✨💜💜💜💜

Precious✨

awaiting more of such gems from you 🔥✨

keep it going💛

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Unknown member
Jan 29, 2023

Brilliant!!!

Good to see a friend having such deep knowledge. !!!

Shocking and inspiring at the same time!

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Unknown member
Jan 28, 2023

Brilliant. Deep thought

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