Husn
By Devesh Shrivastava
जलवे तो जानलेवा है,
दुनिया से थोड़ी पर्देदारी रक्खो,
जिस रात से देखी है इक झलक,
नींदें नहीं आया करती हैं।
हुस्न तो चांद-सा है,
मिज़ाज में थोड़ी जिम्मेदारी रक्खो,
हाल -ए- दीदार को
कतारें लग जाया करतीं हैं।
यूं बेवक्त बेपर्दा ना हुआ करो,
कईयों की गफलत में
ईदें मन जाया करती हैं।।
By Devesh Shrivastava

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