मैं
By Neelam Jha
मैं, मैं, मैं को जला
किस्मत तू अपनी बना,
खुद को तपा
खुद को निखार
कनक-सा तू जगमगाA
तकदीर को लुहार के
हथौड़े से
तू मज़बूत बना
सुनार की छेनी से तराशकर
जग को तू जगमगाA
असफलता के डर से,
किसी के ताने से न तू चरमराA
कोई कहे कुछ भी
‘मेरा क्या’ सोच ये,
सत्पथ पर सदा तू चलता जाA
अवसर नित नये तलाश,
बेहतर कल तू बनाA
मंज़िल क्यों न दूर हो,
राह क्यों न दुष्कर हो,
रच तू अपना इतिहासA
पहुँच तू शिखर पर
जगत में विश्वास का दीप तू जला
जगत में विश्वास का दीप तू जला
जगत में विश्वास का दीप तू जला
By Neelam Jha

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