मां
By Preeti Bansal
मेरी मां जैसी संगिनी ना कोई थी ना कोई है ना हो सकेगी,
वो मेरे अस्तित्व का अहम हिस्सा थी, है और रहेगी।
मैं उसके बिन जी ना पा रही,
हर खुशी में उसकी कमी सी पा रही,
मेरी खुशियों और गम की असली सांझेदार,
ना कोई समझा है, बस वही है और रहेगी उसकी हकदार।
तुझ बिन जिंदगी अधूरी सी हो गई,
हर पल हर जगह तुझे ही ढूंढ रही,
पर बच्चों की तो सखी भी तू खुदा भी तू,
कही ना गई बस हमारे अंदर बसी तू।
By Preeti Bansal

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