मां
By Suchita Joshi
कागज़ कलम लेकर बैठी हाथ में
सोचा आज माँ के विषय में
मैं भी कुछ ख़ास लिखूँ ।
जो मैंने जिये माँ के साथ
वो अपने मीठे एहसास लिखूँ ।।
आँखे बंद कर लगी सोचने
कौनसे लम्हे से सुरुआत करूँ
उसके दूध का क़र्ज़ लिखूँ ।
या मुझे लोरियाँ सुनाने वाली
उसकी मीठी आवाज़ लिखूँ ।।
मेरी नन्ही उँगली को थामे
एक एक पग पार कराती
उसके संयम की थाह लिखूँ ।
या मेरे गिर जाने पर
उसके आँखों से निकलती
वो अश्रु की धार लिखूँ ।।
वो मेरे सिर पे सदा लहराता
उसकी ममता का आँचल लिखूँ ।
या उसकी डाँठ में छुपा हुआ
मेरे लिए अथाह प्रेम लिखूँ ।
या डर लगने पर उसकी गोद में
सिमट जाने का मीठा एहसास लिखूँ ।।
उसकी बाहों में मिलता
सारे जहाँ का सुकून लिखूँ ।
या मेरी छोटी सी उपलब्धि पे भी
उसकी आँखो में खेलती
वो गर्व की मुस्कान लिखूँ ।।
नहीं पिरो सकती शब्दों में
उन लम्हों की मिठास को ।
माँ के साथ जिये पलों के
किस लम्हे को ख़ास लिखूँ
और किस लम्हे को आम लिखूँ ।।
By Suchita Joshi

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