माँ
Updated: Jul 30, 2025
By Uday Kumar
माँ की चरणों में है जन्नत,माँ को नहीं दुत्कारिए!
माँ से अगर कुछ भूल हो जाए,प्रेम से सुलझाईए!
ममता की देवी माता है, जगत श्रृष्टि कर दाता है !
माँ से बड़ा और कोई नहीं,जगत का बो निर्माता है!!
माँ को नमन करें हर-दम,न भूल हम जाएं उनका कर्म!
बचपन से आज जवानी तक,समर्पित उनका तन ,मन ,धन!!
माँ की चरणों की धूल, जो मस्तक पर लगाता है !
धन्य उसी का जीवन है, बो जन्नत(स्वर्ग) का सुख पाता है!!
By Uday Kumar

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