भूख
Updated: Jul 18, 2025
By Uday Gautam Thorat
आँखों में ना प्यास रख,
दिल में ना हवस रख,
तू इंसान है, हैवान नहीं!
किसी जिस्म पर ना नज़र रख।
तेरा भी कोई है उस जैसा,
तू भी उसी नस्ल का है हिस्सा,
क्यों है इतना गुस्सा भरा,
जो उभर आता है बुजदिलों की तरह।
अफ़सोस के कुछ लोग समझ नहीं पाते,
जालिम इरादे से निकल नहीं पाते,
कम-से-कम इतना तो कर दो,
इनके लिए कोई तरीका तो ढूंढो।
जाने कितने ऐसे है अपने,
दर्द रखे पास अपने,
अपनी सोच ही बदलनी है,
कोनसा अलग तीर मारना है,
कायदा ही तो सक्त करना है,
कहा जंग लड़ने जाना है।
मगर ये भी ना हो शायद,
आजकल के कायदे-दारों से,
शायद तख़्त वालों की देन जो है,
हाथ बंधे है मज़बूरी में,
लेकिन नाजुक धागे के,
जो हो ना पाया कुछ किसी से
तो खुद ही इंसाफ करना होगा अपने हाथों से।
By Uday Gautam Thorat

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