बहन
By Parul Rathee
वो समय याद तो नहीं,
पर जिन्होंने देखा मेरा बचपन,
वो बतलाते हैं आज भी, कि भगवान से मांगी बस दुआ एक ही,
"भगवान जी, बस मुझे एक बहन देदो प्यारी सी।
लडता है भाई, डाटते हैं सभी
पर सुनने समझने वाला कोई भी नहीं।"
बतलाते हैं लोग, कि रहती थी उंगली हवा में टंगी,
कोई पूछे तो कहती थी "मेरे साथ मेरी बहन चल रही" ।
फटकारती थी ताई, दादी, नानी और दुनिया सभी,
माँ ने भी समझाया ऐसे बोलते नहीं।
भाई होगा तो लाएगा भाभी बहन सी,
चलाएगा पीढी और भाभी रखेंगी ध्यान,
तू तो चली जाएगी एक दिन, अपने पिया के द्वार।
मैं लडती थी सभी से कि,
" कर लूंगी सब मैं,
पर मुझे तो चाहिए , एक बहन ही"।
जो खेले मेरे संग,
जिससे बांटू मैं अपने दुख-सुख सभी ।
जब भी कुछ मांगा दुनिया से तो पड़ी गाली ही,
पर खुशी है मुझे कि ऊपर वाले ने मेरी ही सुनी।
उठती ना थी गोद में,
पर उठा कर घूमू हर गली,
बहुत खुश थी मैं कि मुझे मिल गई बहन मेरी।
आज भी याद है,
पिटती थी मैं, रोती तू खडी।
गुडिया लाती थी उसके लिए, जो रखी है अलमारी में आज भी।
समय के साथ हम बडे हो गए ।
खो गई मैं कई दफ़ा, पर वो हमेशा हाथ पकड़े हुए।
अब बड़ी हो गई है वो,
समझदार मुझसे ज़्यादा ही रही।
खुशीहैमुझेकिमुझे 'बहन' मिली।
By Parul Rathee

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