चाय
By Keya Trivedi
वो रोज सुबह तेरा इंतेज़ार जैसे तू हो हमारी नातेदार
अब तेरे क्या कहने हाये
रोज सुबह और शाम होती है तुजसे मुलाकात
एक दूजे से पूछते है एकदूजे के ताल्लुकात
अब तेरे क्या कहने हाये
तेरी वो खुशबू और वो अदरक का उबाल
कोई तो उठाये उस खुश्बू पे सवाल
अब तेरे क्या कहने हाये
तेरी वो होठो की छुअन ओर धुआंदार अंदाज़
किसीका भी ध्यान भटकाए
ओर न तो वही अटकाए
अब तेरे क्या कहने हाये
सब ने बांटा तुजे आधा पौना
पर हम तुजे नहीं चाहते कभी खोना
अब तेरे क्या कहने हाये
तू है किसीका गुजरान
पर मेरा तो है तू एक अरमान
तेरे लिए करते है हम फरमान
ओर तू हाजिर हो जाती है बिना मांगे कोई मान
अब तेरे क्या कहने हाये
क्या बोले तुजे फरिश्ता या तुजसे जुड़ा अटूट रिश्ता
अब तेरे क्या कहने हाये
आदत हो गई है तेरी
ओर सहेली बन गई है तू मेरी
अब तेरे क्या कहेने हाये
अब ज्यादा क्या करूँ तेरी बात
बस कभी न छोड़ना हमारा साथ
वो रोज सुबह तेरा इंतेज़ार जैसे तू हो हमारी नातेदार
अबतेरेक्याकहने हाये
By Keya Trivedi

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