गीत
By Surendra Kumar Sharma
मैंने कितने गीत लिखें हैं,
अपने मन की अभिलाषा में |
सांसें खुद जब संवाहक हो,
मौन चिरंतन की भाषा में ||
मन में आशा दीप जलाये,
द्वार खड़ा हूँ इंतजार में |
मैंने हर पल दृग धौयें हैं,
तन्हा आँसू लिए प्यार में |
देख रहा हूँ कब आओगी ,
घर-आँगन में इस आशा में ||
मृदु सपनों की सेज सजाए,
देख रहा हूँ प्रियतम आए |
कितने महल बनाये मैंने,
हर पल नजरों में वे छाए |
डूब न जायें वो पल भर में ,
जीवन की इस परिभाषा में ||
साँसों की सरगम पर मैंने,
कितने राग बजाए - गाए |
धड़कन की सौगंध उठाकर,
तुम संँग कितने स्वप्न सजाए |
पूरी हो जब चाहत मन की,
संचित प्रिय हर जिज्ञासा में ||
By Surendra Kumar Sharma

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