कसक
By Pushkal Sinha
बेपरवाह अदाएं,
घटाओं से बाल,
हसीन सी शक्ल,
और ज़ालिम, वो चाल ।
मेरी यादों में तुम,
आज भी जवां हो,
मैं अब भी वही हूं,
पर तुम कहा हो?
गुस्ताख शोखी,
वो सिर का झुकाना,
बिलजी निगाहें,
हर लफ्ज़ फ़साना ।
बादलों को जैसे,
जमीं न मिली ।
ये तस्वीर तुम्हारी,
तुमसे ही ना मिली ।
सांसों की खुशबू,
हसीं की नुमाइश ।
बेचैन धड़कन,
आसुओं की बारिश ।
मैं छब् तुम्हारी,
कुछ यू देखता हूं,
कोई बोले इबादत,
तुम्हे सोचता हूं।
वो लब कयामत,
जुल्फ़े कयामत ।
नजरें क़यामत,
वो बाज़ू कयामत।
कयामत का सबब,
मियान तेरी।
तेरा होना कयामत,
ना होना कयामत ।
स्याह रातें,
तन्हाई का गम ।
बेज़ार सा मन,
अजनबी से हम ।
ख्वाइशे अधूरी,
कुछ यूं रह गई ।
तेरे होने की कमी,
कमी रह गई।।
By Pushkal Sinha

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