Tum
By Preeti Bansal
कुछ नहीं कह पाता तुमसे पर सुनना चाहती हो तुम,
मुझे बाहों में समेटकर हमेशा रखना चाहती हो तुम,
दिल तड़पे न यू तेरा, मुझे हमेशा के लिए पाना चाहती हो तुम,
राहों से मेरी कांटो को चुनकर, फूलों को बिछाना चहती हो तुम।
मेरे प्यार के समंदर में डूब जाना चाहती हो तुम,
अपने प्यार को हर तरह से मुझपर लुटाना चाहती हो तुम,
सुबह मुझे प्यार से जगाना चाहती हो तुम,
मेरे लिए अच्छा खाना बनाना चाहती हो तुम।
प्यार से भी प्यारे हो वो पल मुझसे चुराना चाहती हो तुम,
खुशनसीब हूं मैं जो दिल में तेरे जगह बना पाया,
यही वजह है जो मेरी रूह में समाई वो खुशबू हो तुम।
By Preeti Bansal

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