Maa
Updated: Jun 1, 2023
By Pooja
न बनी बनेगी कोई कविता, माँ तेरे उपकारों की ।
न कोई लेखनी लिख सकती है, तेरे दिए दुलारो की ॥
सबको आसरा दिया है माँ, तूने अपने अन्दर मे।
फिर भी दुनिया आज खोजती है, ईश्वर को मन्दिर मे ॥
सुनी भूमि थी माँ, और तेरे बिना ये बंजर थी।
बाग़ लगा दे जो बंजर में, वह शक्ति तेरे अन्दर थी॥
जब रूठी बचपन में तुझसे, पीछे-पीछे आती थी।
कभी मिठाई कभी खिलौना, हाथ में देकर जाती थी॥
मेरे सारे रास्तो के माँ तू काँटे चुन जाती थी।
धूल लगे जो कभी मुझे पल््लू से अपने हठाती थी॥
जीत में तो सारी ढुनियाँ, मेरे साथ खड़ी हो जाती थी।
लेकिन जब थी मैं हारी, माँ बस तू ही गले लगाती थी॥
माँ तेरी ममता की, न आज तलक कोई सीमा है।
तेरे से बढ़के न, इस दुनिया में कोई नगीना है॥
आज दूर किया जो तूने मुझको उसमे भी मेरा हित देखा ।
खुदकितनीभीहोदुःखमेंमाँतूनेमेरासुखदेखा॥
By Pooja

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