Maa
By Sanchita
कहां से शुरू करूं -
तेरा उच्चारण, तेरा वर्णन!
कौन माप सका है तुझे?
तेरा स्नेह, तेरा ममत्व।
आदि से अंत तक, धरा से गगन तक,
देवता महंत तक, साधु से संत तक,
सबके लिए पूज्य तू।
विशाल नभ सी, गहरे समंदर सी,
सुगंधित पवन सी, कलरव करते मधुर झरने सी,
कितनी मनमोहक तू।
दूसरों के दुख में, मोती पनपते हुए
परिवार - बच्चों के लिए, अपने भाव सिमटते हुए
देखा है मैंने तुझे।
देखा है- टिमटिमाते तारे में,
चांद के किनारे में,
घुप्प अंधेरे में, जगमगाती किरण है तू।
ममता के आंचल में, नैनों के काजल में,
तपन मिटा दे जो - हो समरूप बादल के!
तेरे कोमल स्पर्श में, निश्छल मुस्कान में
फूलों की सेज से, तेरी ही गोद में
कितना सुकून है।
नौ महीने कोख में, नौ साल गोद में,
शक्ति के नौ रूप सी - तेरी ही ओट में,
कितनी सुरक्षित मैं!
बारिश की बूंद सी, खिलती सी धूप सी
बर्फ़ के चादर से ढके, श्वेत शिखर सी
कितनी पवित्र है तू -
मां!
By Sanchita

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