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Kyu

By Nilofar Iqbal Shedbalkar


क्यों आजाद पंछी की तरह उड नहीं सकता है इंसान

जब की ख्वाहिशे तो उसकी छुती है आसमान

बंदिशो के दायरे में घिरा हे इताना

की दिल पुछता है हर रोज तुझे सुकून है कितना

दिल का क्या है दिल ही तो है बस

हर रोजके उसके ठिकाने हैं नए दस

देख तो सकते है मगर छु नहीं पाते




ख्वाबों के बुलबुले कुछ ऐसेही नजारे है दिखाते

इस दुनिया में हर कोई झूट में जीता है

जिंदगी आसान है उसकी जो हर दिखावे को समझता है

अफसोस है मगर कि वो कुछ कर नहीं पाता है

इन दिखावे की बेडियोंसे जुंज नहीं पाता हे

क्यू की दिल तो कैद है एक पिंजरे में

दिमाग के किसी अंधेरे मे

दुनिया के झूठे नजारे में

क्यू की दिल तो कैद है एक पिंजरे में



By Nilofar Iqbal Shedbalkar




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1件のコメント

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Barakha Shedbalkar
Barakha Shedbalkar
2023年5月20日
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