ख़त
Updated: Jun 10, 2023
By Nitika Soin
अब तो तेरी दुआओं से डर लगता है,
के आते जाते फलक पे सर लगता है।
इस ख्वाब से कहो ज़रा इत्मिनान से रहे,
ये मुझपर अजब असर रखता है।
मैं इतनी कड़वी नहीं हूँ जाना,
ये मेरे अंदर ज़हर रखता है।
बस इस दिल में जगह बनी ही थी,
बस शुरू तेरी अदाओं का असर लगता है।
जब ख़त लिखा तो तेरा नाम भी लिखा ऊपर,
हमें कौन सा ज़माने से डर लगता है।
फ़िज़ाओं में अजब खुशबू सी घुली है,
पास ही किसी शायर का घर लगता है।
वो जो कश्तियों को परवान दे रहा है,
वो मुट्ठी में दबा के कहर रखता है।
ये कहाँ से उठा के कहाँ बैठा दिया मुझको,
इतनी ऊँचाई से तो हमें डर लगता है।
By Nitika Soin

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