तू
By Manish Upreti
है जल सके तो आग तू, नहीं तो शून्य खाक तू
तू पूछता है प्रश्न जो, उसी का है जवाब तू
पगों में तेरे शूल हैं, ललाट में है चांदनी
रगों में जो ये तेज़ है, उसी का है प्रमाण तू
धैर्य धर, विवेक रख, समय तेरा भी आएगा
थे साथ जो वो साथ हैं? समय तुझे बताएगा
वचन तेरे हों रस भरे, ज़हां तू जीत जाएगा
भाग्य को न कोस तू तेरा भाग्य तू बनाएगा
न हो दुखी न कर रुदन, न भावना से हीन तू
हुंकार भर, प्रहार कर, ला बाज़ुओं में ज़ोर तू
न कर कभी घमंड तू, लड़ मगर प्रचंड तू
युद्ध जब है हो चुका, कर शत्रु खंड-खंड तू
स्थूल तू विशाल तू, है शत्रुओं का काल तू
जिस डोर से है ज़िन्दगी, उस डोर को सँभाल तू
भगत तू ही, सुभाष तू, लाल बाल पाल तू
हाल है तू देश का, देश का है हाल तू
By Manish Upreti

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