top of page

Life

By Mukul Goyal


सपने है बच्चो से,

उलझनें है बड़ो सी,

फिर भी खुद से अंजान है।


कोई चाहता दौलत,

तो कोई चाहता शौहरत,

किरदार फिर भी सबका इन्सान है।


कोई तरस रहा अपनों के लिए,

तो कोई डर रहा अपनों के बीच,

इसमें प्यार और एहसास का मतलब समझना ही

परिपक्वता की पहचान है।



कोई सीखता अपने नीड़ में,

तो कोई सीखता ज़िन्दगी की इस भीड़ में,

अपने सपनों को हासिल करना ही सबकी पहचान है ।


किसी को मिलते जख्म,

तो किसी को मिलते मरहम,

मंजिल तक पहुँचना ही राहगीर का काम है।


किसी को मिलता मकान कच्चा,

तो किसी को मिलती मीनार हसीं,

उनमें खिलखिलाकर हसना ही ज़िन्दगी का नाम है।


लेकिन अपने हिस्से का सबको मिलता,

किसी को ठोकर,

तो किसी को खोकर,

आतिश में खेलना फिर भी बुझदिलों का काम है।


By Mukul Goyal



3 views0 comments

Recent Posts

See All

Maa

By Hemant Kumar बेशक ! वो मेरी ही खातिर टकराती है ज़माने से , सौ ताने सुनती है मैं लाख छुपाऊं , वो चहरे से मेरे सारे दर्द पढती है जब भी उठाती है हाथ दुआओं में , वो माँ मेरी तकदीर को बुनती है, भुला कर 

Love

By Hemant Kumar जब जब इस मोड़ मुडा हूं मैं हर दफा मोहब्बत में टूट कर के जुड़ा हूं मैं शिक़ायत नहीं है जिसने तोड़ा मुझको टुकड़े-टुकड़े किया है शिक़ायत यही है हर टुकड़े में समाया , वो मेरा पिया है सितमग

Pain

By Ankita Sah How's pain? Someone asked me again. " Pain.." I wondered, Being thoughtless for a while... Is actually full of thoughts. An ocean so deep, you do not know if you will resurface. You keep

Comments

Rated 0 out of 5 stars.
No ratings yet

Add a rating
bottom of page