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चाबी भरा रोबोट

By Nipun Vinayak


और ये वीरानियाँ अंदर की जैसे अपने अंदर ख़ुद की लाश जो सब वो करती है जो उसे सिखाया गया है जो उस ने सीखा है जिस को देख कर लोगों ने तालियाँ बजाई


वो जीती नहीं महसूस नहीं करती प्यार नहीं करती प्यार नहीं समझती फ़र्ज़ समझती है


ठहरो वो लाश नहीं ध्यान से देखो चाबी भरा रोबोट है जिसे पता है क्या सही है क्या ग़लत




और वो निरंतर और सही और सही करता है Zero defect और six sigma की ओर बढ़ता है Planning करता है


वो करता है जो जानवर नहीं कर सकते वो भूलता है जो जानवर करते हैं

सही और ग़लत की सामाजिक परिभाषाएँ मानता है


और दम तोड़ देता है ये समझने से पहले की सही ग़लत के मायने बेमाने थे की आदमी जानवर का फ़र्क़ बेमाना था



By Nipun Vinayak




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