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दर

By Saumya Garg


ढूँढ लाना हमें

उस डगर से

हर दफ़ा

जिस पर तुम्हारा

दर न हो

पर हम भटक कर

चले गए हों।


हम हर दफ़ा

लौटना चाहेंगे

तेरे ही दर पर।



घर है वो,

रास्ता भटक गए तो क्या!

घर नहीं बदलता,

तुम हाथ थामकर

ले आना हमको वापस

सही डगर पर

सही दर पर

सही सलामत...


By Saumya Garg



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5 Comments

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shivam gupta
shivam gupta
Oct 12, 2023
Rated 5 out of 5 stars.

उत्तम रचना 😲

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Shekhar Shukla
Shekhar Shukla
Sep 13, 2023
Rated 5 out of 5 stars.

Beautifully penned. प्रेम पथ पर साथ चलते हुए प्रेमी से भटक जाना, फिर एकाकी जीवन में उसको याद करना, उसे वापस पा लेने की इच्छा पर आधारित भावपूर्ण कविता।

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epic paramount
epic paramount
Sep 13, 2023
Rated 5 out of 5 stars.

Awesome, beautiful writing😀👏

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Siddharth Singhal
Siddharth Singhal
Sep 13, 2023
Rated 5 out of 5 stars.

Amazing!

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Raghvendra Garg
Raghvendra Garg
Sep 13, 2023
Rated 5 out of 5 stars.

Awesome poetry

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