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Anant

By Pratiksha Singh


आदि भी मैं अंत भी मैं हूँ ।

तुझमें मैं मुझमें भी मैं हूँ ।

जल में मैं हूँ थल में मैं हूँ ।

सृष्टि के कण कण में मैं हूँ ।


अंधकार और ज्योत में मैं हूँ ।

नीति में संयोग में मैं हूँ ।

जन्म मरण विलोप में मैं हूँ ।

मिलन में वियोग में मैं हूँ ।





अंतर में बाहर में मैं हूँ ।

सत्य असत्य और छल में मैं हूँ।

निर्बल मैं बलवान भी मैं हूँ ।

ज्ञानी मैं अज्ञान भी मैं हूँ।


निराशा मैं विश्वास भी मैं हूँ।

मौन मैं कोलाहल मैं हूँ।

लाभ में हानि में मैं हूँ ।

स्वार्थ मैं निस्वार्थ भी मैं हूँ ।


द्वार मैं आश्रय भी मैं हूँ ।

मार्ग मैं साधन भी मैं हूँ ।

चिंतन में और चलन में मैं हूँ ।

रोम रोम और श्वास में मैं हूँ।



By Pratiksha Singh




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2件のコメント

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不明なメンバー
2023年5月19日

तुम्हारी लिखावट आदी से अंत तक यूंही निखरते रहे.. बहुत सुंदर लिखा है

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Midhun Roy
Midhun Roy
2023年5月16日
5つ星のうち5と評価されています。

❤️

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