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मां

By Vanshika Singh


मां की छांव

मां का आंचल

वह खाना वह डांट

वह प्यार और ढेर सारा दुलार

जिससे हो चली मैं दूर अपनी मां की बातों को भूल

याद आती है मां तेरी आंखें भर जाती है

मेरी लगता है ऐसा कभी छोड़कर यह सब अभी

चली आओ मां मैं तेरे पास

लगा लेना मुझे तुम

सारी दुनिया को भूल

मां तेरा आंचल मां तेरी डांट बहुत याद आती है

कहां थी मैं तो कहां ले आई

उंगली पकड़कर मेरी तू चलाई

आज फिर से उस उंगली की तलाश में हूं

गिर जाऊं मैं तो उठा लेना मां,




पूछे मुझसे बेटा चोट तो नहीं आई और घाव देख कर तू जो घबराई

आज तो तुझ से इतनी दूर हूं मां

चोट भी लगे तो खुद ही संभलना है,

तेरे आंचल में कब तक रहूंगी,

ख्वाहिश इतनी सी मां

तू एहसास दिलाती रहती ममता का

कभी छोड़ कर गई तो रूठ जाऊंगी मैं

एक बार पुकारना प्यार से दौड़ी चली आऊंगी मैं

लगाना मुझे सीने से

जाने ना देना मुझे अपने दिल से दूर

जब तक तेरा साथ है तब तक मेरी सांस है

और कोई है ना तुझसे बढ़कर मां

लड़ जाऊं मैं तेरे लिए

सारी दुनिया से

बस तू मेरा साथ देना - बस तू मेरा साथ देना


By Vanshika Singh






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