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धधक

By Ankita Dwivedi


फिर जन्मी है एक चिंगारी ,धधकी है एक आग नई

बीच चौराहा गली -मोहल्ला ,उठ गई है एक बात नई

मोमबत्ती की लौ कुछ ,ऐसी पल्लू उसका राख हुआ है

नारों का है शोर जोर से, पत्थर दिल भी आग हुआ है

Her tears speak for strength and eyes for pride

Her screams are shut but her lips spread wide

Patronizing the fear, you inspire

One that glides down her dupatta right into her belly

It’s guarding a treasure

She is awake she is aware.

I watch her every day from these sideways.

She Smiles subtly at her neighbour and silently drowns in despair.

उंगली उठा कर अस्तित्व पर उसकी,

आंखों से वो सवाल पूछते हैं

जलती मशालें फिर हाथ में उठाकर ,

आग से वो आंखें सेकते हैं।

फुसफुसा जाती है कभी आवाज कोई,

तो खुदको तर्क हजार देते हैं।

और दिल तक पहुंच जाए महज आहट उस आवाज की,

तो बड़ी बेरहमी से मार देते हैं।

Who is she?

Someone who bleeds every month to keep the world going?

Who sometimes wears her scars and sometimes smile for the showing?

Or, is she a machine to birth child and serve?

What she asks are rights or demands?

Is it something she deserves?

जरूरी है ,पहले जान लेते हैं

उसकी पहचान को एक बार पहचान लेते हैं

कौन है वो ?

वो गीता के पन्नों का ज्ञान है ? या सीता की धुंधली दहलीज है?

वो बुर्के में कैद अन्जान है ?या आंचल में छुपे एहसास की पहचान है?

सही गलत का फर्क है ?तमाम गुनाहों का तर्क है?

उसके पैरों में यह जंजीरें कैसी?

उसकी हंसी पे यह लकीरें कैसी?

ये अंधेरा कैसा है ?यह कोहरा क्यों है?

क्या आईना तुम हो? क्या अफसाना वो है ?

उतर जाती है किसी की कलम से वो तस्वीर सी कोरे कागज पर

मोती-सा सजा देती है हर किसी का अपनी तिलस्मी ताक़त से

Then why?




Why do they take her tears for weakness, body for shame?

Success for contingence, womanhood fir disdain.

Wrapping women in pink feathers of prejudice, innocently alluding their manhood to mockery.

Her skin marked with lashes of belt, or boundaries they created.

Her heart melts away like the candle of momentary protests, she is holding her breath exasperated.

She barely breathes and often bleeds.

The wounds you cast from your poisonous seeds.

She runs, she crawls, she fights with claws.

She is a warrior, a protector, a guard, a keeper.

Then, why you break her down?

Why you cut her open?

जब आग की लपटें खामोशी निगल रही थी ,तुम चुप थे

जब रात की चादर ने उस बिलकती मां को पनाह नहीं दी, तुम चुप थे

जब उसके शरीर के टुकड़ों को चुनना पड़ा ,

उसके कपड़ों के चिथरों को बूनना पड़, तुम चुप थे

जब चीखी, वो चीखी मदद के लिए

जब रोई वो ऐसे कि अब क्या गिले

जब वर्दी ने मजहब की कीमत लुटाई

जब इंसानों ने इंसानियत बेच के की कमाई

तुम चुप थे ,तुम चुप थे

मैं खडा था वहा

मैं चीखा, मै सिस्का किसी ने ना सुना

मैंने पत्ते गिरा कर बदन ढक दिया

अपने आंसुओं से किस्तों में रोया भी फिर

तुम चुप थे, तुम चुप थे, तुम चुप थे

Shhh....

खून से लथपथ है बदन उसका

नफरत ने जंग में फ़तह कर ली है

Her tongue was cut , she couldn’t scream anymore

They were so afraid of her credibility that they destroyed it .

वो चिंगारी जूतों तले दब जाती है

धधकी हुई आग की लौ एक बार फिर बुझ जाती है

बातों का रुख बदल जाता है

मोमबत्ती का मोम पिघल जाता है

रखो का ढेर बन जाता है उसका अस्तित्व

जिसका कलंक हम सब के माथे पर लग जाता है

The blood is on me, but it is on you too.


By Ankita Dwivedi






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