तुम
- Hashtag Kalakar
- Dec 1
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By Manas Saxena
सुना है कि तुम पढ़ती बहुत हो
शोर मौहल्ले में भी पसंद नहीं
तुम्हारे मौहल्ले के बच्चे लड़वा दिये हमने
चाहें तुम्हारे दीदार के इंतज़ार में ही सही |
भले नाराज़ी से ही सही
बच्चों को हड़काने से ही सही
भले ही हमसे मिलने न सही,
बेहरहाल बहार आओ तो सही
जिस रोज़ से तुम्हारी गली में तुमसे
अपने इश्क का बखान करते फिरते है
सुना है तुम्हारे पड़ोसी भी
खिड़की से झाँकने लगते है |
और वो कहती है कि
मेरी गली से यूँ रोज न निकला करो
लोग मुझे तुम्हारे नाम से चिढ़ाते हैं,
मगर मता ए जान सिर्फ तुम ही नहीं
अपने जानने वालों में हम भी
तुम्हारे नाम से छेड़े जाते हैं ||
By Manas Saxena

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