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वक्त

By Jagruti Parish Jadhav


उस वक्त से इस वक्त तक तुमसे मिलने को हू बेकरार

कही निकलना जाये ये वक्त भी हर बार की तरह इस बार...


हर बार की तरह इस वक्त मे भी खो जाना चाहती हू तुम्हारे खयालो मे

पर ये वक्त हर पल की तरह मुझे डुबो देता है तुम्हारे उन अनसुलझे सवालो मे...


ये सवाल हर वक्त हर शाम एक हलकीसी हवा का झौका लेकर आते है

और रात मे तेज तुफान बनकर सब खतम कर चले जाते है...





आओ ना उस वक्त से इस वक्त मे मुझे वापस ला दो

दूर ना जाओ कही बस अपने प्यार के रंग मे मुझे भिगा दो...


पर अब ये वक्त बडा बेरहम सा होता जा रहा है

हरपल मुझे तुमसे दूर लेता जा रहा है...


टूटने लगी है ख्वाहिशे हर पल अब

ले जा रही है मुझे तुझसे दूर हर वक्त अब...


वक्त वक्त कितना वक्त आखिर कितना करू मे इंतेजार

शायद बितता हुआ हर वक्त मुझसे केहता है की ..नही आयेगा वो अब भी उसबार की तरह इसबार...


By Jagruti Parish Jadhav





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