मोहन
- Hashtag Kalakar
- Nov 26
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By Arpita Yadav
क्यों मोह मैंने कर लिया ,
क्यों रास मैंने रच लिया,
तुमसा नहीं छलिया कोई,
क्यों प्रेम मैंने कर लिया ।
गोपियों का मोह के मन,
राधा का हर के तन मन,
मीरा का समस्त जीवन,
हे गिरधर, फिर क्यों होने दिया तुमने महाभारत जैसा युद्ध हवन ।
बृज-गोपियों ने दिया मन,
राधा ने तन मन ,
मीरा ने संपूर्ण जीवन,
हे मोहन, तुमको मेरा नमन ।
कुरुक्षेत्र के मैदान में,
दुर्योधन जैसे शैतान में,
खेली गई खून की होली,
बोली गई युद्ध की बोली।
हुआ महाभारत जैसा भीषण युद्ध,
पांडव थे जिसके विरुद्ध,
शकुनि , दुर्योधन और सौ कौरव,
जो न हो सके कभी शुद्ध।
दुर्योधन ने मचाया तांडव ,
क्रोधित होने लगे पांडव,
पुत्र प्रेम ने घेरा धृतराष्ट्र को ,
जिसका आघात हुआ हस्तिनापुर राष्ट्र को।
तुम बंसी छोड़,
चक्र उठा बैठे,
राधे छोड़,
युद्ध गले लगा बैठे,
रख ली तुमने मर्यादा चीर की ,
एक सारथी बन,
सेना पूरी हरा बैठे ।
तुम ही प्रेम,
तू प्रांत भी हो ,
तुम भूचाल,
तुम शांत भी हो,
बृज के गिरधारी तुम,
तुम द्रौपद के जीवांत भी हो।
By Arpita Yadav

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