पिता
- Hashtag Kalakar
- Aug 8, 2025
- 1 min read
By Poorvi Joshi
तेरे प्यार की छाया में पली थी
बचपन की वो दुनिया कितनी भली थी
तेरी सिख तेरी डांट कभी भूल पाऊना
उसके पीछे जो परवाह और प्यार की गहराई थी
उस वक्त उसे माप पाऊं ना
विदा तो कर दिया पराया धन बोल कर
पर दिल से तो कभी हुई ना पराई थी
बाबा तेरी दुनिया कितनी भली थी
तेरे प्यार की छाया में पली थी
उपर से कठोर अंदर से नरम
पिता तेरे प्यार का कैसा है ढंग
सबसे ज्यादा गुस्सा दिखाता है
दर्द मुझे हो तो
अकेले में सब से ज्यादा आंसू बहाता है
औलाद कैसी भी हो पिता अपना फर्ज निभाता है
ऐसा प्यारा पिता भी कहा सब के हिस्से में आता है
वो दुनिया बड़ी प्यारी थी जो तेरे आंगन में गुजारी थी
ये शब्द नही मेरे एहसास है
मेरे पिता मेरे लिए बहुत खास है
तेरे प्यार की छाया मे पली थी
बचपन की वो दुनिया कितनी भली थी
By Poorvi Joshi

True and heart touching
Very nice
👏🏻👏🏻
Well written. Worth a read 👏
Lovely poem
Nice poem