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पतझड़

By Jash Doshi



ए पतझड़ तुझमें मुझ मां का विश्वास है,

तपती धूप को सहकर भी तुझमें सर्जन के बीज का वास है।

कहे कान्हा वो स्वयं ऋतुओं में वसंत है,

तथापि तू महादेव का निर्मल श्वास है,

अंत से निर्मित आदि तू है,

वसंत के रंगमंच का नेपथ्य निर्देशक तू ही है,

प्रकृति की प्रसूति प्रवृत्ति का आभास तू है।


By Jash Doshi




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