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नारी

By Anishka Majethia



लोग कहते है उसे नारी जिससे बढ़ती है दुनिया सारी, अपने गर्भ में पाल कर जन्म देती है और न जाने इसमे कितना कष्ट सहती है,


वैसे तो लोग लगाते है ‘नारी सम्मान’ के नारे लेकिन क्या सच में उनकी इज्ज़त करते है लोग सारे?

अपने परिवार को अच्छे से संभाल तो पाती है लेकिन इसके पीछे अपने आप को तो भूल ही जाती है,


आज भी कुछ लोग कहते है कि है ज़िंदगी उनकी उन्हीं चार दीवारों में जो नहीं इच्छा उनके मन की, बच्चों और पति को संभाले, करे घर का काम जिसके पीछे बदल ही जाता है उनका अपना नाम,





जैसे कोई ज़बरदस्ती हो, चाहे स्वस्थ हो या बीमार फिर भी संभालना पड़ता है उन्हे अपना घर-संसार, बडा होकर जब अपना खून जवाब देने लगता है तो उन्हे अपना संसार बिखरा हुआ दिख्ता है,


एहसास होता है हमे भी, कि हमारी माँ भी सही थी जहाँ आज हम है, वो भी कल वही थी, देर बहुत हो जाती है जब तक समझ पाते हैं और हमारे संतान भी तब तक बडे हो जाते है,


नारी है वो, चाहे माँ, पत्नी या बहन मत करवाओ उन्हें ज़्यादा सहन, उनके अंदर छुपी है एक अनोखी शक्ति सी जो एक बार इस्तेमाल करने कि ठान ली तो नहीं आएगी बचाने मुक्ति भी,


चुप रहकर सहती है, देती है सबको प्यार कोशिश करती है मिटाने को रिश्तों कि दरार, दो उन्हे इज्ज़त, करो उनका सम्मान तो अपने आप ठीक रहेगा उनका मानसिक तापमान,


नारी है वो, है हमारी जन्मदात्री, कमजोर नहीं मज़बूत है, चाहे दिवस हो या रात्रि

!!!


By Anishka Majethia




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