हिसाब
- Hashtag Kalakar
- Dec 1
- 1 min read
By Akanksha Mishra
मेरे पूछे हर सवाल पर,
अपने अधूरे जवाबों का,
हिसाब रख रहे हो ना?
मुलाक़ात के अधूरे वादों का,
तुम्हें याद कर के,
छत पर उभरे,
सीलन के धब्बों को ताकते कटी रातों का,
हिसाब, रख रहे हो ना?
मेरे मोहब्बत के इज़हार की छाती पर,
तुम्हारी चुप्पी के, कई घाव हैं,
उन पर लगी आंसुओं की पट्टी का,
हिसाब, रख रहे हो ना?
यूं तो,
धरती हर पल खिसकती है,
तूफ़ान हर रोज़ ही आते हैं,
पर तुम्हारे इंतज़ार में,
दिल में उठती हर एक सुनामी का,
हिसाब रख रहे हो ना?
कहते हो के मोहब्बत,
शब्दों की मोहताज नहीं,
पर खामोशी शह में,
बढ़ती मन की दूरी का,
हिसाब रख रहे हो ना?
क्या करोगे,
जो वक्त गुजर गया तो?
वो जवाब, वो तोहफ़े, वो बातें,
वो मिलने की अधूरी ख्वाहिश?
किसे लौटाओगे,
मेरे हिस्से की मोहब्बत?
सही वक़्त के इंतज़ार में,
रेत से फिसलते लम्हों का,
हिसाब...रख रहे हो ना?
By Akanksha Mishra

Great work
True lines
Nice
Usse har cheez naap tol ki hi mili, jaise kirane ki dukan ho 😿 hisab rakh hi rhe honge
Nice words