हिममानव
- Hashtag Kalakar
- Nov 28
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By Dhruwa Shankar Prasad
जब जाड़े के दिनों में
सूरज की ऊष्मा थोड़ी कम हो जाती है
इस ऊष्मा की कमी की भरपाई के लिए
हमारे घरों में कुछ वस्तुएं पाई जाती हैं
इनमें से कुछ को स्वेटर कहा जाता है
कुछ को जैकेट कहा जाता है
कुछ को कार्डिगन कहा जाता है
कुछ को मफरल कहा जाता है
कुछ को स्कार्फ कहा जाता है...
पर आश्चर्य !
बड़ों के बार-बार समझाने के बाद भी
बच्चों को समझ कहां आता है !
स्वयं को जब दर्पण में देखते हैं
इन्हें हिममानव नजर आता है !
हे ! भ्रम -निर्मित स्वघोषित हिममानव !
जाड़े में ठिठुरते रहना
क्लासरूम से बाहर धूप की चाह में जाते रहना
फैशन के बहाव में बहते रहना
खुद से खुद ही उलझते रहना
फिर उलझन को अनसुलझा छोड़ते रहना
बुद्धिमानी नहीं है
यह बात आपको क्यों समझ आती नहीं है ?
बस आप से इतना कहना है
जान है , तो जहान है
यह फैशन , यह अति उत्साह कुछ काम न आयेगा
जब आपको जाड़ा लग जाएगा
और तो और तबियत ज्यादा खराब होने पर इंजेक्शन भी लग जाएगा
विद्यालय भी छूट जायेगा
इसीलिए घर में स्वेटर, जैकेट , मफरल, कार्डीगन, स्कार्फ... नया पुराना जो भी है
उसे पहना कीजिए
लोग क्या सोचेंगे - यह मत सोचा कीजिए
अच्छे से तैयार हुआ कीजिए
फिर विद्यालय आया कीजिए
ठंड से खुद को खुद बचाया कीजिए
ठंड से खुद को खुद बचाया कीजिए ।
By Dhruwa Shankar Prasad

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