सुकून
- Hashtag Kalakar
- Dec 16, 2025
- 1 min read
By Nisha Mittal
सुकून, तू आना तो ऐसे आना
आँसू की बौछार में मत आना
मुस्कुराहट में बुनकर आना
भीड़ बनकर आना चाहे तन्हाई
कोई मसला नहीं हैं
बस खालीपन मत लाना
न अतीत सुझाना
न भावी स्वप्न दिखाना
बस मेरा खोया आज बनकर आना
दिल की नरमी में मत झाँकना
दिमाग की सख्ती मत बनना
कठिन कोमलता लिये आना
न झूठे दिलासों में आना
न सच्चे वादों में आना
कोरे कागज सा आना
सब पाने की होड लेकर मत आना
क्या छोडना है, इसकी समझ बतलाना
तसल्ली का तूफान लेकर आना
न उलझनों का सागर लाना
न सीप का मोती बनकर आना
आइने सा निश्छल अक्स साथ लाना
उदित-अस्त से परे होकर आना
जिंदगी और ख्वाब का फर्क लेकर आना
सीने में दफन ख्वाहिशों का कफ़न बनकर आना
लम्बें भटकाव के बाद मुझे ,मुझसे मिलाने के लिये आना
तेरे इन्तजार में ..... ...
By Nisha Mittal

Very nice!!
Well written, keep it up
Well written keep it up
Nice poem
Very nice it was touching